श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय:अष्टमोSध्याय

मृत्यु के द्वार पर जिज्ञासा -“राजा परीक्षित के २९ प्रश्न “|

१. कथा प्रवेश : गंगा तट पर अंतिम सात दिन

कुरुजांगल देश के सम्राट परीक्षित को श्रृंगी ऋषि के शाप से ज्ञात हुआ कि सातवें दिन तक्षक नाग के डंस से उन की मृत्यु होगी | राज्य,परिवार वैभव त्याग कर वे गंगा तट पर आमरण अनसंन पर बैठ गए |उन का एक संकल्प था – “जो समय बचा हुआ है वह भगवान की कथा में बीते “| उसी समय व्यास नन्दन शुकदेव जी १६ वर्ष की आयु के दिगम्बर वेश में पधारे | समस्त ऋषि मुनि खड़े हो गये किन्तु शुकदेव जी परीक्षित के पास जा कर बैठ गए | राजा ने उन के चरणों में सिर रख कर प्रार्थना की -“गुरुदेव जो मनुष्य मृत्यु के निकट हो ,उस के लिए श्रेष्ठ कर्तव्य क्या है ?.

यहीं से द्वितीय स्कन्ध के अष्टम अध्याय का आरम्भ होता है |

2. मूल पाठ का सार – परीक्षित की २९ जिज्ञासाएं ,शुकदेव को प्रणाम करके परीक्षित ने जो प्रश्न किये वे सम्पूर्ण भागवत की बीज है |

-खंड क सृष्टि -विज्ञान सम्बन्धी प्रश्न –

१-ब्रह्मा जी ने नारद को निर्गुण भगवान के गुण सुनाने को कहा था तो नारद ने वे गुण किन किन को किस रूप में सुनाए ?

2.भगवान की कथाएँ सब लोकों के लिए परम मंगलकारी क्यों हैं ?

3. मुझे ऐसा उपदेश दीजिए जिस से मैं मन को श्रीकृष्ण में लगा कर आसक्ति रहित हो कर देह छोड़ सकूं |

४. जीव का पंचभूतों से कोई सम्बन्ध नहीं ,फिर भी उस का शरीर पंचभूत से ही बना है |यह स्वभाव से होता है या किसी कारण से ?

५. आप ने कहा भगवान की नाभि से कमल निकला ,जिस से लोक बने ,फिर परमात्मा को सिमित अंगों वाला क्यों कहा ?

६. ब्रह्मा जी जिन की कृपा से सृष्टि करते हैं वे स्थिति -उत्पति प्रलय के हेतु परमात्मा माया त्याग कर कहाँ किस रूप में शयन करते हैं ?

7. पहले कहा विराट पुरुष के अंग से लोक बने ,फिर कहा लोकों को उस के अंग माना दोनों का तात्पर्य क्या है ?

८. महाकल्प कितने हैं ?

9. उन की भीतर अवान्तर कल्प कितने हैं ?

10. भूत,भविष्य वर्तमान काल का अनुमान कैसे किया जाता है ?

११.क्या स्थूल देह वाले जीवों की आयु बंधी हुई है ?

12. काल का सूक्ष्म गती,त्रुटी आदि कैसे जानी जाती है ?

१३.काल की स्थूल गती-वर्ष आदि कैसे जानी जाती है ?

१४. विविध कर्मों से जीवों की कितनी और कैसी गतियाँ होती हैं ?

१५.सत्व रज तम से देव मनुष्य आदि योनियाँ मिलती हैं -कौन जीव किस योनी के लिए कौन सा कर्म करता है ?

१६ पृथ्वी पाताल,दिशा,आकाश,ग्रह,नक्षत्र,पर्वत,नदी,समुद्र,द्वीप की उत्पति कैसे होती है ?

१७.उन में रहने वाले जीवों की उत्पति कैसे होती है ?

१८. ब्रम्हांड का भीतरी परिमाण कितना है ?

१९.ब्रम्हांड का बाहरी परिमाण कितना है ?

२०.महापुरुषों के चरित्र क्या हैं ?

२१. वर्णाश्रम के भेद और उन के धर्म क्या हैं ?

२२. युगों के भेद क्या हैं ?

२३. युगों का परिमाण कितना है ?

२४.प्रत्येक युग का अलग धर्म क्या है ?

25. विभिन्न युगों में भगवान के अवतारों के आश्चर्यमय चरित्र कौन से हैं ?

२६. मनुष्यों के साधारण और विशेष धर्म कौन से हैं ?

२७. व्यवसायियों ,राजर्षियों और विपतिग्रस्त लोगों के धर्म क्या हैं ?

२८. तत्वों की संख्या कितनी है ,उन के स्वरूप लक्षण क्या हैं ?

२९ भगवान की आराधना और अध्यात्म योग की बिधि क्या है ?

शुकदेव जी से आगे और भी पूछा गया –

+ योगेश्वरों के ऐश्वर्य,उन की अंतिम गती,लिंग शरीर का टूटना ,वेद उपवेद धर्म शास्त्र इतिहास पुराण का तात्पर्य ?

+ प्राणियों की उत्पति ,स्थिति,प्रलय,स्मार्त ,वैदिक,काम्य,कर्म,अर्थ,धर्म,काम की बिधि ?

+ प्रलय में लीन जीव फिर कैसे जन्मते हैं,पाखंड कैसे उपजता है ,आत्मा का वन्ध-मोक्ष क्या है ?

+ भगवान अपनी माया से कैसे क्रीडा करते हैं और फिर साक्षी भाव से उदासीन कैसे हो जाते हैं ?

इन्हीं ४ प्रश्नों को मिला कर आचार्य परम्परा में कुल २९ जिज्ञासाएं गिनी गईं हैं | इसलिए पाठ्यपुस्तकों में इसे खंड क सृष्टि विज्ञान के २९ प्रश्न कहा गया है | शुकदेव जी के उतर देते हुए कहा कि यह विज्ञान स्वयं भगवान ने ब्रम्हा को ब्रम्ह कल्प के आरम्भ में दिया था और वही श्रीमद्भागवत के रूप में परीक्षित को सुनाया गया |

नोट – जो जिज्ञासु इन प्रश्नों के उतर जानने के इच्छुक हैं,वे मेरी वेबसाइट thegodweknow.com पर पढ़ते रहें उन्हें इन सब जिज्ञासाओं के उतर एक एक करके मिलते रहेंगे | अगली पोस्ट में प्रश्न एक का उतर है ,पढ़ें |

लेखक-मदन लाल शर्मा

वेबसाइट-thegodweknow.com

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