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Shrimdbhagavate Conto 3 Chaper 14.Shrimdbhagavate Conto 3 Chaper 14.
The Pregnancy of Diti in the Evening This is the story of how the two most powerful demons in the universe took birth ,and how {...}
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The Pregnancy of Diti in the Evening This is the story of how the two most powerful demons in the universe took birth ,and how {...}
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दिल्ली देश की राजधानी ही नहीं ,बल्कि देश के शैक्षिक ,वैचारिक और लोकतांत्रिक आन्दोलनों का केंद्र भी रही है | जे एन यूं ,दिल्ली विश्वविद्यालय,जामिया {...}
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चाणक्य और हमारे शास्त्रों में राजा को केवल शासक ही नहीं ,बल्कि प्रजा का पिता ,सेवक और योगी -तीनों एक साथ माना है | चाणक्य {...}
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श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के एकादश अध्याय में सृष्टि के सब से गूढ़ तत्व -काल का वर्णन है |यह संवाद विदुर जी और मैत्रेय मुनि {...}
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परमपावन श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में हम ने देखा कि ब्रह्मा जी ने भगवान की स्तुति की और भगवान ने उन्हें {...}
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तृतीय स्कन्द के त्रयोदशोSध्याय में ब्रह्मा जी की मानसिक सृष्टि का वर्णन सुनने के बाद विदुर जी के मन में जिज्ञासा और बढ़ गई | {...}
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The Appearance of Lord Varaha. This thirteenth chapter of the third conto of shrimdbhagavate describes one of the most powerful and beloved incarnations of Lord {...}
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सृष्टि विस्तार ,कुमारों का वैराग्य और रूद्र की उत्पति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के बारहवे अध्याय में सृष्टि के आदि रहस्य का वर्णन है {...}
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SHIRIMDBHAGAVATAM CONTO THREE _-CHAPTER TWELVE The Creation of the Kumaras and others In continuation of the description of creation , Sri Maitreya Rishi said to {...}
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The Mystery of Time eternal wheel of Creation – In the peaceful hermitage of Haridwar,Vidura who had renounced everything to seek the truth was sitting {...}
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“Division of the Creation “ Shribhagavatam is narreted by Maitreya Muni to Vidura. After discribing the universal form of the Lord and the process of {...}
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ब्रह्मा जी द्वारा भगवान की स्तुति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में सृष्टि के आदि ब्रह्मा जी द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति {...}
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Brahma’s Prayers for Creative Energy In the third Cnto’s ninth chaper,Lord Brahma,seated on the lotus born from Vishnu’s navel ,feels bewildered about his duty of {...}
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ब्रह्मा जी की उत्पति – बहुत काल पहले की बात है |जब यह सम्पूर्ण सृष्टि महाप्रलय के जल में डूबी हुई थी ,चारों और केवल {...}
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विदुर जी के प्रश्न – तृतीय अध्याय के सप्तम अध्याय में हस्तिनापुर छोड़ कर तीर्थ यात्रा करते हुए विदुर जी मुनिवर मैत्रेय जी से मिलते {...}
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विराट पुरुष की उत्पति – प्राचीन काल की बात है ,जब सृष्टि का आरम्भ भी नहीं हुआ था ,तब केवल एक ही तत्व बिद्यमान था {...}
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प्रस्तावना -श्रीमद्भागवत पुराण का तृतीय स्कन्ध सृष्टि रचना के रहस्यों को खोलता है |इस के पंचम अध्याय का नाम है”विदुर मैत्रेय संवाद “|इस अध्याय में {...}
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उद्दव जी से विदा हो कर विदुर जी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना – तृतीय स्कन्ध के चतुर्थ अध्याय में विदुर जी और उद्दव {...}
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धृतराष्ट्र के महलों में जब अन्धकार छा गया था,जब कौरवों का अहंकार हस्तिनापुर की गलियों में विष घोल रहा था ,ठीक उसी समय विदुर जी {...}
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पृष्ठभूमि -दो भक्त,एक विरह हस्तिनापुर की गद्दी पर युधिष्ठर के बैठने के बाद विदुर जी तीर्थयात्रा पर निकल पड़े | ३६ साल घुमते घुमते प्रयास {...}
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परिचय :कौन थे महिदास ऐतरेय ? महिदास ऐतरेय प्राचीन भारत के एक महान वैदिक ऋषि थे ,इन का नाम सुनते ही “ऐतरेय ब्राह्मण “और ऐतरेय {...}
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श्रीमद्भागवत का तृतीय स्कन्ध ‘सर्ग’ यानी सृष्टि प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करता है | द्वितीय स्कन्ध में ब्रह्मा जी द्वारा नारद को चतुश्लोकी भागवत {...}
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भगवान के लीला अवतारों की कथा- अध्याय का सन्दर्भ -द्वितीय स्कन्ध के सप्त अध्याय में ब्रह्मा जी अपने मानस पुत्र देव्ऋषि नारद को भगवान के {...}
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शीर्षक-भागवत के दस लक्षण -जीवन को समझने की दस चाबियां | गंगा तट पर बैठे राजा परीक्षित के मन में प्रश्न उठा ,वे शुकदेव जी {...}
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ऋषि याज्ञवल्क्य -वैदिक परम्परा के सब से तेजस्वी विचारकों में से एक हैं |वृहदारन्यक उपनिषद में इन की पत्नी मैत्रेयी के साथ संवाद भारतीय दर्शन {...}
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चतु:श्लोकी भागवत का उपदेश – श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कन्ध: ,नवम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रम्हा जी को सृष्टि रचना से पहले केवल ४ श्लोकों {...}
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मृत्यु के द्वार पर जिज्ञासा -“राजा परीक्षित के २९ प्रश्न “| १. कथा प्रवेश : गंगा तट पर अंतिम सात दिन कुरुजांगल देश के सम्राट {...}
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विराट स्वरूप की विभूतियों का वर्णन – भूमिका -प्रश्न और प्रसंग -श्री शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं ,राजन -जब नारद जी ने ब्रह्मा {...}
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सृष्टि वर्णन वक्ता ब्रम्हा जी -श्रोता देवऋषि नारद जी -कथा का आरम्भ ,नारद जी की जिज्ञासा – एक बार देवऋषि नारद जी अपने पिता ब्रम्हा {...}
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१.ब्रह्मा जी के जन्म के बाद घौर अज्ञान और अकेलापन – जब भगवान गर्भोदकशायी विष्णु की नाभी से कमल निकला तो उस कमल पर ब्रह्मा {...}
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विषय- राजा परीक्षित का सृष्टिविषयक प्रश्न और सृष्टि का आरम्भ शुकदेव जी की बात सुन कर परीक्षित का मन और शांत हो जाता है |अब {...}
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कौशिक नामक एक ब्राह्मण थे |ब्रह्मचर्य व्रत पर अटल थे |एक दिन पेड़ की छाँह में बैठे वेद पाठ कर रहे थे कि इतने में {...}
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विषय: जो भगवान को नहीं भजते उन का जीवन व्यर्थ है | पहले दो अध्यायों में शुकदेव जी ने ध्यान का तरीका बताया ,अब तीसरे {...}
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विषय-योग साधना से भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूप का चिन्तन – पहले अध्याय में शुकदेव जी ने बताया कि ईश्वर का ध्यान करो |अब {...}
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विषय -ध्यान के योग्य परमेश्वर का स्वरूप राजा परीक्षित ने श्री शुकदेव जी से पूछा था कि मरने वाले आदमी को क्या करना चाहिए ? {...}
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बहुत से लोग पूछते हैं ईश्वर कैसा है ? कोई कहता निराकार ,कोई साकार |पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ क्या कहते हैं ? ऐतरेय ब्राह्मण के आधार {...}
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परीक्षित का अनशन व्रत और शुकदेव जी का आगमन – राजधानी में पहुंचने पर राजा परीक्षित को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिए बड़ा पश्चाताप {...}
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मेरी वेबसाईट का उद्देश्य लोगों को ब्राह्मण ग्रन्थों के आधार पर ईश्वर के स्वरूप से अवगत करना है -मदन लाल शर्मा डोमेन नाम thegodweknow.com/.in-सीधा और {...}
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राजा परीक्षित को शृगी ऋषि का शाप -जब तक पृथ्वी पर राजा परीक्षित सम्राट रहे ,तब तक चारों और व्याप्त हो जाने पर भी कलियुग {...}
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महाराज परीक्षित द्वारा कलियुग का दमन -धर्म और पृथ्वी जब आपस में बात कर रहे थे उसी समय राजा परीक्षित वहां पहुंचते हैं ,तो क्या {...}
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परीक्षित की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वी का संबाद -पांडवों के महाप्रयाण के बाद भगवान के परम भक्त राजा परीक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षा के {...}
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एक जिज्ञासु एक बार एक संत के पास गया और बोला – महाराज ,कोई ऐसा उपाय बताइए ,जिस से मुझे प्रभु का साक्षात्कार हो जाये| {...}
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श्रीकृष्ण विरह व्यथित पांडवों का परीक्षित को राज्य दे कर स्वर्ग सिधारना -भगवान के प्यारे सखा अर्जुन एक तो पहले ही श्रीकृष्ण के विरह से {...}
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परीक्षित का जन्म – अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था ,उस से उतरा का गर्भ नष्ट हो गया था ,परन्तु भगवान ने उसे पुन: जीवित {...}
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धर्म कोई मनघडन्त वस्तू नहीं है | नित्य की जीवन यात्रा में धर्म के साथ मनुष्य का गहरा नाता है |धर्म से जीवन को मिलती {...}
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अपशगुन देख कर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का दवारका से वापिस आना – स्वजनों से मिल कर श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते {...}
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कौशाम्बी के राजपुरोहित का पुत्र था अभिरूप कपिल | आचार्य इन्द्रदत्त के पास अध्ययन करने श्राबस्ती आया हुआ था | आचार्य ने उस के भोजन {...}
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आजकल शूद्र नाम लेने मात्र से ही यह मान लिया जाता है कि यह वर्ण निकृष्ट है | पर यह वास्तव में लोगों की महान {...}
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अहिंसा के आदर्श महर्षि वशिष्ठ कुशिक वंश में उत्पन्न राजा विश्वमित्र सेना के साथ आखेट करने निकले थे | अपने राज्य से दूर महर्षि वशिष्ठ {...}
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सनातन का अर्थ है नित्य |वैदिक धर्म का नाम सनातन धर्म अत्यंत उपयुक्त है |अन्य किसी भी भाषा में धर्म वाचक कोई भी शब्द नहीं {...}
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संसार में अनेक धर्म,नाना मत और अगणित सम्प्रदाय हैं |प्रत्यक्षत: उन सब का उद्देश्य एक ही है – मानव हृदय में परस्पर एक आध्यात्मिक सम्बन्ध {...}
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विदुर के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना – विदुर जी तीर्थ यात्रा से लौट आये ,उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा {...}
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द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत -श्रीकृष्ण ने अपने आनर्त देश में पहुंच कर वहां के लोगों की विरह वेदना दूर करते हुए अपना पांचजन्य {...}
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आज से प्राय: कुछ सौ वर्ष पहले पूर्व प्रख्यात भाषाविद मैक्समूलर तथा उस के अनुयायों ने आर्यवाद की कहानी रची है | यह कहानी पूर्णत: {...}
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श्रीकृष्ण का द्वारका गमन -सम्पूर्ण सृष्टि को उज्जीवित करने वाले श्री हरी परस्पर क्ल्हाग्नि से दग्ध कुरुवंश को पुन: अंकुरित कर और युधिष्ठर को उनके {...}
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युधिष्ठर आदि का भीष्म जी के पास जाना और श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए भीष्म का प्राण त्याग करना -महाभारत का युद्ध समाप्त होने पर {...}
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गर्भ में परीक्षित की रक्षा ,कुंती द्वारा भगवान की स्तुति और युधिष्ठर का शोक -पांडव श्रीकृष्ण के साथ अपने युद्ध में मरे भाई बन्धुओं के {...}
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अश्वथामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन द्वारा अश्वथामा का मानमर्दन – जिस समय महाभारत युद्ध में कौरव और पांडव दोनों पक्षों {...}
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नारद जी के पूर्वचरित्र का शेष भाग – व्यास जी की जिज्ञासा नारद जी की शेष आयु कैसे व्यतीत हुई और मृत्यु के समय उन्होंने {...}
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महऋषि व्यास जी ने महाभारत की रचना की थी ,वे धर्म आदि पुरुषार्थों से परिपूर्ण थे ,सनातन ब्रह्म तत्व को भी जानते थे ,समस्त गोपनीय {...}
Theology
छान्दोग्योपनिषद में शाण्डिल्यऋषि का तत्व ज्ञान दार्शनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है | शाण्डिल्य सृष्टि मीमांसा में चरम सत्य तज्जलान को प्रथमत: सिध्द करते हैं | {...}
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इस वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महऋषि पराशर के द्वारा वसु-कन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के अवतार व्यास जी का जन्म हुआ {...}
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सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोकों के निर्माण की इच्छा से पुरुष रूप धारण किया | उस में दस इन्द्रियां ,एक मन और पांच {...}
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सूत जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है | यह समस्त वेदों का सार है | जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकार से पार {...}
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मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग {...}
History Mythological Religion Religious
ध्यायत्श्चरनाम्भोजं भावनिर्जितसा | औत्कन्ठ्याक्षुकलाक्षस्य हरदयासीन्में शनैर्हरि: | | प्रेमातिभरनिर्मिन्नपुलकाग्डोSतिनिर्वृत: | आनन्दसम्प्लवे लीनो नापश्यमुभ्यं मुने || रूपं भगवतो यत्नमन:कान्तं शुचापहम | अपश्यन सहसोतस्ये वैक्लव्याद दुर्मना इव {...}
Mythological Religion Religious
महान तत्ववेता दध्यड के ,दधिची एवं दधीच नामान्तर थे |वे अथर्वकुल में उत्पन्न हुए थे | कई स्थानों में उन्हें अथर्वन का पुत्र कहा गया {...}
Mythological Religion Religious Theology
मह्रिषी वामदेव गोतम ऋषि के पुत्र थे | ऐसा माना जाता है कि उन्हें माता के गर्भ में रहते हुए ही आत्मानुभूति ,आत्म साक्षात्कार हुआ {...}
Religion Religious Theology
संसार में अनन्त जीव हैं ,उन में मानव ही सर्व श्रेष्ठ है | मह्रिषी व्यास जी ने भी यही कहा है कि मनुष्य से बढ़ {...}
Mythological Religion Religious Theology
भगवान व्यास के निर्देशानुसार पांडवों ने नियम बनाया था कि द्रोंपदी के साथ पन्द्रह पन्द्रह दिन प्रत्येक भाई रहे | जब एक भाई द्रौपदी के {...}
Mythological Religion Religious Theology
किसी को अपने से अधिक उन्नत ,सम्पन्न या सुखी देख कर मन में होने वाले कष्ट या जलन जिस के साथ उस व्यक्ति को वैभव {...}
History Mythological Religion Religious
एक समय राजा शान्तनु गंगा के किनारे घूम रहे थे,उन्होंने देखा एक सुन्दर युवती गंगा के किनारे खड़ी थी | उस के सौन्दर्य और नवयोवना {...}
Mythological Religion Religious Theology
भगवान् व्यास ऋषि पराशर के कीर्तिमान पुत्र थे | चारों वेदों का क्रमबद्ध करके उन का संकलन करने का श्रेय इन्हीं को है |महाभारत की {...}
Mythological Religion Religious Theology
सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सभी देवताओं के बीच सब से पहले ब्रह्मदेव अर्थात ब्रह्मा की सृष्टि की और उस के बाद वह चराचर सृष्टि में प्रवृत {...}
Mythological Religion Religious Theology
एकोSपि पृथ्वी कृत्स्नामेकच्छ्त्रा प्रशांस्ति च | एकस्मिन्नेव राष्ट्रे तु स चापि निवसेंनृप: || तस्मिन राष्ट्रSपि नगरमेकमेवाधितिष्टति | नगरेSपि गृहं चैकं भवेत तस्य निवेशनम || एक {...}
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समस्त चराचर जगत में एक आत्मा ,परमात्मा या एक भगवान को देखने बाला धर्म ही वास्तविक धर्म है | वस्तुतः एक आत्मा या भगवान् के {...}
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संसार का प्रतेक धर्म गंगा और युफ्रेटिस नदियों के मध्यवर्ती भूभाग पर उत्पन्न हुआ है | एक भी बड़ा धर्म यूरोप या किसी दूसरे देश {...}
History Mythological Religion Religious Theology
आगे होई जेहिं सुरपति लेई | अरध सिंघासन आसन देई|| -यह महाराज दशरथ का प्रभाव कहा गया है | अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट का वह {...}
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महाभारत की युद्ध समाप्ति के बाद ,भगवान् श्रीकृष्ण छतीस वर्ष तक द्वारिका में राज्य करते रहे | उन के सुशासन में श्रीकृष्ण के समान वंशी {...}
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महर्षि वामदेव जो गोतम ऋषि के पुत्र थे उन्हें गर्भ में ही आत्मानुभूति-आत्मसाक्षात्कार हुआ था | ब्रह्म -साक्षात्कार के लिए जीवन का कोई विशेष आश्रम {...}
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भारत के ज्ञान और विज्ञान को जानने वाले महऋषि नारद जी का हमारे पुराणों में बार बार उल्लेख मिलता है | वे राजा हरिश्चंद्र के {...}
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ब्रह्मा जी के पुत्र महाराज स्वायम्भुव मनु और उन की पत्नी महारानी शतरूपा से प्रियव्रत और उतानपाद दो पुत्र हुए | उतानपाद की सुनीति और {...}
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सर्व प्रथम सीता के जन्म की कहानी रामायण में ही वर्णित है ,जहाँ उस का पृथ्वी से उत्पन्न होने का उल्लेख मिलता है जो की {...}
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सुनियो एक संदेसो ऊधो गोकुल को जात | ता पाछे तुम कहियो उनसों एक हमारी बात || माता पिता को हेत जानी के कान्ह मधुपुरी {...}
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श्री कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद गोकुल वासी उन के वियोग से दुखी हो गये | नन्द यशोदा ,ग्वाल और गोपियों को सभी {...}
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साकारमनृत् विद्धि निराकारं तु निश्चलं | एततत्वोपदेशेन न पुनर्भवसंभव: || आत्मा के साकार रूप को वास्तविक मत समझ | उस का रूप तो निराकार है,ज्ञान {...}
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जैसे शरीरधारियों की छ: इन्द्रियाँ होती हैं वैसे ही नहुष के छ: पुत्र थे उन के नाम यति ,ययाति ,संयाति,आयती,वियति और कृति |नहुष अपने बड़े {...}
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“Consciousness is a fundamental thing,it is the fundamental thing in existence ;It is the energy ,the motion,the movement of consciousness that creates the universe and {...}
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भगवान की लीला पर विचार करते समय यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि भगवान का लीलाधाम ,भगवान के लीलापात्र ,भगवान का लीलाशरीर और उन की {...}
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योग के लक्षण जिस के द्वारा चित शुद्ध और प्रसन्न हो कर परमात्मा के मार्ग में प्रवृत हो जाता है | यथा शक्ति शास्त्र सम्मत {...}
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रेणुऋषि की कन्या रेणुका से जमदग्नि ने उस का पाणीग्रहण किया |रेणुका के गर्भ से जमदग्नि ऋषि के वसुमान आदि कई पुत्र हुए| उन में {...}
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महात्मा बुद्ध ने उन्नीस वर्ष की आयु में ही जीवन में संसार के दुखों से मुक्ति प्राप्त करने का उपाय ढूँढने के लिए अपने परिवार {...}
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” All Evolutionis in essence a heightening of the force of consciousness in the manifest Being so that It may be raised into the greater {...}
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एक दिन की बात है ,परशुराम जी की माता रेणुका गंगातट पर गई हुई थी |वहां उस ने देखा कि गन्धर्वराज चित्ररथ कमलों की माला {...}
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प्रसिद्ध चिन्तक फ्रायड ने अपनी जीवनी में लिखा है कि एक बार वे अपनी पत्नी व् छोटे से बच्चे के साथ बगीचे में घूमने गए {...}
Religion Religious
यत्पिंडे तत्ब्रम्हांडे” जैसा शरीर है वैसा ही ब्रम्हांड है |हजारों वर्ष पहले भारतीय मनीषियों ने गहन अध्ययन कर के यह निष्कर्ष निकाला था कि प्रत्येक {...}
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भारत में व्यबस्था की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि उस का संचालन करने वाले किस तरह के हैं | संचालनकर्ताओं की प्राथमिकता {...}
Mythological Religion Religious Theology
(पुराणों से कहानियाँ ) भगवान शिव ने समस्त भोगों का त्याग कर रखा है लेकिन जो भी उन की उपासना करता है चाहे वह कोई {...}
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(मनु स्मृति -अध्याय 2 श्लोक २३८) श्रद्धधान : शुभां विद्यामाददीताबराद्पि || अन्त्याद्पि परं धर्म स्त्रीरत्न दुष्कुलादपि || श्रध्दायुक्त हो शुभ कहिये जिस की शक्ति देखी {...}
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मनुष्य हमेशा प्रतिदिन की बातचीत में कई बार मैं शब्द का प्रयोग करता है लेकिन आश्चर्य है कि प्रतिदिन मैं और मेरा शब्द का कई {...}
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प्रकृति ,पुरुष और महातत्व आदि के लक्षण सांख्य शास्त्र में कहे गए हैं तथा जिस के द्वारा उन का वास्तविक स्वरूप अलग अलग जाना जाता {...}
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भौतिक सुखों के विषयों के प्रति उदासीनता विकसित करना वैराग्य है जिस ने सभी सांसारिक सुख और मोह माया का त्याग कर दिया है वह {...}
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धार्यते इति धर्म:जो धारण किया जाये वह धर्म है ,समाज में मनुष्य जीवन के प्रति जो धारणा बनाता है वही उस का धर्म है |गीता {...}
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सृष्टी से पहले यह जगत जिसे हम यूनिवर्स कहते हैं अंधकार में लीन और अज्ञात अर्थात जिसे जाना न जाये और अलक्षण अर्थात जो चिन्ह {...}
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समय किसी भी कार्य को करने का सही क्षण होता है |समय अतीत से वर्तमान और भविष्य के क्रिया कलापों को क्रम में करता है {...}
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हम मैं से उस का अर्थ अपने शरीर से लेते हैं लेकिन मैं शरीर नहीं हूँ कभी सोच कर देखो |मैं कौन हूँ ,जानने के {...}
Religion Religious Theology
निरखि किन नयना होऊ निहाल | अति अदभुत आनंद-अम्बुद -सी सोहत सो सुखमा सुविसाल ||१ || नीरद-तनु दामिनी-सी दमकत छिन-छिन छवि-कन झरत रसाल | अंग-अंग {...}