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श्रीकृष्ण:शरण ममश्रीकृष्ण:शरण मम

निरखि किन नयना होऊ निहाल | अति अदभुत आनंद-अम्बुद -सी सोहत सो सुखमा सुविसाल ||१ || नीरद-तनु दामिनी-सी दमकत छिन-छिन छवि-कन झरत रसाल | अंग-अंग {...}