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भक्ति योग की महिमाभक्ति योग की महिमा

भगवान कपिल द्वारा माता देवहूति को ब्रह्म ज्ञान – प्रस्तावना और पूर्व कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के 28 वें अध्याय तक भगवान कपिल {...}

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प्रवाह्न जैब्ली का आत्म चिन्तनप्रवाह्न जैब्ली का आत्म चिन्तन

जीवन के साय: काल में एक ठहराव है – यह आत्म चिन्तन किसी आत्म प्रशंसा का दस्तावेज नहीं है ,न ही यह मेरे जीवन की {...}

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अष्टावक्र – 8अष्टावक्र – 8

बंधन – मुक्ति श्लोक- तदा बन्धो यदा चितं किन्चिद वांछति शोचति | किंचिन मुंचति गृन्हाती किन्चिद हृष्यति कुप्यति ||१|| अर्थ – श्री अष्टावक्र जी कहते {...}

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कपिल गीता-सांख्य योग से सृष्टि -रहस्यकपिल गीता-सांख्य योग से सृष्टि -रहस्य

श्रीमद्भागवत का तृतीय स्कन्ध वैराग्य और ज्ञान का स्कन्ध है | इस में कर्दम ऋषि और देवहूति के संवाद के माध्यम से सृष्टि का आदि {...}

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जनक का आत्म चिन्तनजनक का आत्म चिन्तन

मिथिला के सिंहासन पर बैठा हुआ मैं,जनक | लोग मुझे राजा कहते हैं ,विदेह कहते हैं ,ज्ञानी कहते हैं | पर मैं कौन हूँ? यही {...}

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अष्टावक्र -7अष्टावक्र -7

पहले छ: प्रकरणों में अष्टावक्र जी ने उपदेश दिया उस प्रकरण में से राजा जनक की अनुभूति बोल रही है |जनक कहते हैं -अब मैंने {...}

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माता देवहूति को कपिल का उपदेशमाता देवहूति को कपिल का उपदेश

देवहूति का प्रश्न तथा भगवन का भक्ति योग की दिव्य कथा की महिमा का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण समस्त वैदिक शास्त्रों का सार है |इस के {...}

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पिप्लाद मह्रिषी का आत्म चिन्तनपिप्लाद मह्रिषी का आत्म चिन्तन

आत्म् चिन्तन कोई घटना नहीं,एक सतत प्रक्रिया है| जीवन के कोलाहल में जब सब कुछ बाहर की और भाग रहा होता है ,तब एक क्षण {...}

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अष्टावक्र -6अष्टावक्र -6

लयात्मसातोपदेश अहं वा सर्वभूतेषु सर्वभूतान्यथो मयि |इति ज्ञानं तथैतस्य न त्यागो न ग्रहों लय: || मैं ही समस्त चराचर में व्याप्त हूँ और समस्त चराचर {...}

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हिटलर के नस्लवाद और राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के नस्लवाद में समानताएंहिटलर के नस्लवाद और राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के नस्लवाद में समानताएं

इतिहास में विचारधाराए अक्सर अलग अलग भोगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठ भूमियों में जन्म लेती हैं ,लेकिन उन की संरचना भाषा और लक्ष्य में आश्चर्य जनक {...}

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श्री कपिल जी का जन्मश्री कपिल जी का जन्म

तृतीय स्कन्ध के चौवीसवें अध्याय में परम पावन अवतार श्री कपिल भगवान के प्रादुर्भाव की कथा है |य्ह अध्याय भक्ति ज्ञान और वैराग्य का संगम {...}

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मरणासन्न जीव की दशा और तत्वमसि महावाक्य का स्वरूपमरणासन्न जीव की दशा और तत्वमसि महावाक्य का स्वरूप

भारतीय दर्शन में जीवन का सत्य मृत्यु को नहीं,मृत्यु के समय जीव की चेतना की दशा को माना गया है | इसी सन्दर्भ में सामवेद {...}

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अष्टावक्र -5अष्टावक्र -5

लयोपदेश- श्लोक-१ न ते संगोSस्तिकेनापि किं शुद्धस्त्यक्तुमिच्छ्सी |संघातविलयं कुर्वन -नेवमेव लयं ब्रज || १|| अर्थ- हे जनक,तुम्हारा वास्तव में किसी भी वस्तु व्यक्ति या संसार {...}

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नचिकेता -मृत्यु के बाद की स्थिति – कथानचिकेता -मृत्यु के बाद की स्थिति – कथा

भारतीय अध्यात्म के इतिहास में मृत्यु जैसा गूढ़ रहस्य शायद ही कोई दूसरा हो | मृत्यु क्या है ? मरने के बाद क्या होता है {...}

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कर्दम ऋषि और देवहूति का विवाह -कथाकर्दम ऋषि और देवहूति का विवाह -कथा

श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के बाइसवें अध्याय में मानव सृष्टि के विस्तार की एक अत्यंत पावन और प्रेरणादायक कथा का वर्णन है | यह कथा {...}

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कडोह और राजा जनक का आत्मचिंतनकडोह और राजा जनक का आत्मचिंतन

भारतीय दर्शन परम्परा में ज्ञान की दो धाराएं समानंतर चलती हैं-एक शास्त्रार्थ की दूसरी चिन्तन की |शास्त्रार्थ बाहर होता है और आत्मचिंतन भीतर | मिथिला {...}

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अष्टावक्र -4अष्टावक्र -4

अष्टावक्र गीता का चतुर्थ प्रकरण ज्ञान की निष्ठा की पराकाष्ठा है |यह जनक की आत्म अनुभूति का साक्षात्कार है | श्लोक -ह्न्तात्मज्ञस्य धीरस्य खेलतो भोगलीलया {...}

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अष्टावक्र गीता -3अष्टावक्र गीता -3

अष्टावक्र गीता का तृतीय प्रकरण आत्मज्ञान की परीक्षा का प्रकरण है |इस में ऋषि अष्टावक्र राजा जनक को बताते हैं कि ज्ञान सुन लेना अलग {...}

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हिटलर और आज का भारतहिटलर और आज का भारत

हिटलर की जर्मनी में विपक्ष को समाप्त करने और आज के भारत में विपक्ष के कमजोर होने को लेकर जो तुलना की जाती है ,उस {...}

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कर्दम मुनि की तपस्या और वर प्राप्तिकर्दम मुनि की तपस्या और वर प्राप्ति

श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के इक्कीसवें अध्याय में सृष्टि के विस्तार की अत्यंत पावन कथा है |इस अध्याय को मनु-कर्दम संवाद के नाम से {...}

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सनातन की परिभाषा -सनातन क्या है ?सनातन की परिभाषा -सनातन क्या है ?

अर्थ- जो शाश्वत है ,जिस का ना आदि है न अंत | जो सदियों से है और रहेगा | सनातन धर्म किसी एक व्यक्ति ,ग्रन्थ {...}

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अष्टावक्र गीता -2अष्टावक्र गीता -2

आत्म-ज्ञान का अनुभव – यह प्रकरण राजा जनक के आत्म अनुभव का वर्णन है |प्रथम प्रकरण में अष्टावक्र जी ने ज्ञान दिया ,द्वितीय प्रकरण में {...}

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विविध सृष्टि का वर्णनविविध सृष्टि का वर्णन

ब्रह्मा की रची हुई अनेक प्रकार की सृष्टि का वर्णन की कथा | श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के बीसवें अध्याय सृष्टि विज्ञान का अत्यंत गूढ़ {...}

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इतिहास के पढने से क्या शिक्षा मिलती है ?इतिहास के पढने से क्या शिक्षा मिलती है ?

१. अतीत को समझना और वर्तमान को जानना आज जो हम हैं ,वह हमारे अतीत का ही परिणाम है | हमारा समाज ,हमारी संस्कृति ,कानून {...}

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हिरण्याक्ष वधहिरण्याक्ष वध

श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के १९ वें अध्याय में भगवान के वराह अवतार द्वारा हिरण्याक्ष के वध की परम पावन लीला का वर्णन है {...}

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अष्टावक्र गीताअष्टावक्र गीता

प्रथम प्रकरण -आत्म -साक्षात्कार यह प्रकरण राजा जनक और बाल ऋषि अष्टावक्र के संवाद से आरम्भ होता है | यह समस्त वेदान्त का सार है {...}

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हिरण्याक्ष की विजय यात्राहिरण्याक्ष की विजय यात्रा

हिरण्याक्ष की विजय यात्रा और वराह भगवान के साथ युद्ध का आरम्भ – पूर्व पीठिका – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध में सृष्टि के विस्तार और {...}

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हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष का जन्म तथा हिरण्याक्ष का दिग्विजयहिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष का जन्म तथा हिरण्याक्ष का दिग्विजय

दिति के गर्भ की कथा – तृतीय स्कन्ध के सौलह्वें अध्याय में कथा आती है कि जय-विजय को सनकादि के श्राप से वैकुण्ठ से गिरना {...}

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अष्टावक्र -गीताअष्टावक्र -गीता

अष्टावक्र का जीवन परिचय भारतीय ऋषि परम्परा में मह्रिषी अष्टावक्र का नाम अद्वितीय बाल तेजस्वी ,आत्मज्ञानी और निर्भीक तत्व वेता के रूप में लिया जाता {...}

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जय-विजय का वैकुण्ठ से पतनजय-विजय का वैकुण्ठ से पतन

पिछले अध्याय में आप ने सुना कि किस प्रकार ब्रह्मा जी के चार मानसपुत्र सनक,सनन्दन ,सनातन और सनत्कुमार ,जो सदा पांच वर्ष के बालक के {...}

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आत्मबोध के मनीषी -सत्यकाम जाबालआत्मबोध के मनीषी -सत्यकाम जाबाल

सत्यकाम का जीवन-वृत्त और तत्व ज्ञान भारतीय ज्ञान परम्परा में उपनिषद केवल ग्रन्थ नहीं हैं ,वे सत्य की खोज की जीवंत प्रयोग शालाएं हैं |उन {...}

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वैकुण्ठ धाम-जय-विजय को सनकादि का शापवैकुण्ठ धाम-जय-विजय को सनकादि का शाप

श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के पंचदश अध्याय में वैकुण्ठ लोक के अलौकिक स्वरूप का अत्यंत मनोहर वर्णन और भगवान के द्वारपाल जय विजय के अहंकार {...}

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दिति का गर्भ धारण तथा दैत्य उत्पतिदिति का गर्भ धारण तथा दैत्य उत्पति

तृतीय स्कन्ध के तेहरवें अध्याय में वराह अवतार की कथा के बाद विदुर जी के मन में एक शंका उत्पन्न हुई | उन्होंने मैत्रेय ऋषि {...}

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दिल्ली में चल रहे छात्र आन्दोलन पर सरकार को क्या करना चाहिए ?दिल्ली में चल रहे छात्र आन्दोलन पर सरकार को क्या करना चाहिए ?

दिल्ली देश की राजधानी ही नहीं ,बल्कि देश के शैक्षिक ,वैचारिक और लोकतांत्रिक आन्दोलनों का केंद्र भी रही है | जे एन यूं ,दिल्ली विश्वविद्यालय,जामिया {...}

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चाणक्य और शास्त्रों के अनुसार राजा (शासक) के कर्तव्यचाणक्य और शास्त्रों के अनुसार राजा (शासक) के कर्तव्य

चाणक्य और हमारे शास्त्रों में राजा को केवल शासक ही नहीं ,बल्कि प्रजा का पिता ,सेवक और योगी -तीनों एक साथ माना है | चाणक्य {...}

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मन्वन्तर और काल गणना का रहस्यमन्वन्तर और काल गणना का रहस्य

श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के एकादश अध्याय में सृष्टि के सब से गूढ़ तत्व -काल का वर्णन है |यह संवाद विदुर जी और मैत्रेय मुनि {...}

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सृष्टि के दस प्रकार -ब्रह्मा द्वारा रचना का विस्तारसृष्टि के दस प्रकार -ब्रह्मा द्वारा रचना का विस्तार

परमपावन श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में हम ने देखा कि ब्रह्मा जी ने भगवान की स्तुति की और भगवान ने उन्हें {...}

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वाराह अवतार की दिव्य कथावाराह अवतार की दिव्य कथा

तृतीय स्कन्द के त्रयोदशोSध्याय में ब्रह्मा जी की मानसिक सृष्टि का वर्णन सुनने के बाद विदुर जी के मन में जिज्ञासा और बढ़ गई | {...}

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श्रीमद्भागवत स्कंध तृतीय:द्वादशोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कंध तृतीय:द्वादशोSध्याय

सृष्टि विस्तार ,कुमारों का वैराग्य और रूद्र की उत्पति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के बारहवे अध्याय में सृष्टि के आदि रहस्य का वर्णन है {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:नवमोSध्याय:की कथाश्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:नवमोSध्याय:की कथा

ब्रह्मा जी द्वारा भगवान की स्तुति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में सृष्टि के आदि ब्रह्मा जी द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:अष्टमोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:अष्टमोSध्याय:

ब्रह्मा जी की उत्पति – बहुत काल पहले की बात है |जब यह सम्पूर्ण सृष्टि महाप्रलय के जल में डूबी हुई थी ,चारों और केवल {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:सप्तमोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:सप्तमोSध्याय

विदुर जी के प्रश्न – तृतीय अध्याय के सप्तम अध्याय में हस्तिनापुर छोड़ कर तीर्थ यात्रा करते हुए विदुर जी मुनिवर मैत्रेय जी से मिलते {...}

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श्रीमद्भागवत पुराण :तृतीय: स्कन्ध:षष्ठोSध्यायश्रीमद्भागवत पुराण :तृतीय: स्कन्ध:षष्ठोSध्याय

विराट पुरुष की उत्पति – प्राचीन काल की बात है ,जब सृष्टि का आरम्भ भी नहीं हुआ था ,तब केवल एक ही तत्व बिद्यमान था {...}

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श्रीमद्भागवत – भागवत कथाश्रीमद्भागवत – भागवत कथा

प्रस्तावना -श्रीमद्भागवत पुराण का तृतीय स्कन्ध सृष्टि रचना के रहस्यों को खोलता है |इस के पंचम अध्याय का नाम है”विदुर मैत्रेय संवाद “|इस अध्याय में {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:चतुर्थोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:चतुर्थोSध्याय:

उद्दव जी से विदा हो कर विदुर जी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना – तृतीय स्कन्ध के चतुर्थ अध्याय में विदुर जी और उद्दव {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:तृतीय:तृतीयोSध्याय:श्रीमद्भागवत स्कन्ध:तृतीय:तृतीयोSध्याय:

धृतराष्ट्र के महलों में जब अन्धकार छा गया था,जब कौरवों का अहंकार हस्तिनापुर की गलियों में विष घोल रहा था ,ठीक उसी समय विदुर जी {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:द्वितीयोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:द्वितीयोSध्याय:

पृष्ठभूमि -दो भक्त,एक विरह हस्तिनापुर की गद्दी पर युधिष्ठर के बैठने के बाद विदुर जी तीर्थयात्रा पर निकल पड़े | ३६ साल घुमते घुमते प्रयास {...}

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महिदास ऐतरेय का आत्मचिंतनमहिदास ऐतरेय का आत्मचिंतन

परिचय :कौन थे महिदास ऐतरेय ? महिदास ऐतरेय प्राचीन भारत के एक महान वैदिक ऋषि थे ,इन का नाम सुनते ही “ऐतरेय ब्राह्मण “और ऐतरेय {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय:स्कन्ध: प्रथमोSध्यायश्रीमद्भागवत तृतीय:स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

श्रीमद्भागवत का तृतीय स्कन्ध ‘सर्ग’ यानी सृष्टि प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करता है | द्वितीय स्कन्ध में ब्रह्मा जी द्वारा नारद को चतुश्लोकी भागवत {...}

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श्रीमद्भागवत द्वतीय:स्कन्ध: सप्तमोSध्याय:श्रीमद्भागवत द्वतीय:स्कन्ध: सप्तमोSध्याय:

भगवान के लीला अवतारों की कथा- अध्याय का सन्दर्भ -द्वितीय स्कन्ध के सप्त अध्याय में ब्रह्मा जी अपने मानस पुत्र देव्ऋषि नारद को भगवान के {...}

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श्रीमद्भागवत-द्वितीय:स्कन्ध:दशमोSध्यायश्रीमद्भागवत-द्वितीय:स्कन्ध:दशमोSध्याय

शीर्षक-भागवत के दस लक्षण -जीवन को समझने की दस चाबियां | गंगा तट पर बैठे राजा परीक्षित के मन में प्रश्न उठा ,वे शुकदेव जी {...}

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याज्ञवल्क्य का आत्म चिन्तन “मैं कौन हूँ ‘?की अमर खोजयाज्ञवल्क्य का आत्म चिन्तन “मैं कौन हूँ ‘?की अमर खोज

ऋषि याज्ञवल्क्य -वैदिक परम्परा के सब से तेजस्वी विचारकों में से एक हैं |वृहदारन्यक उपनिषद में इन की पत्नी मैत्रेयी के साथ संवाद भारतीय दर्शन {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय :स्कन्ध:नवमोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय :स्कन्ध:नवमोSध्याय

चतु:श्लोकी भागवत का उपदेश – श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कन्ध: ,नवम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रम्हा जी को सृष्टि रचना से पहले केवल ४ श्लोकों {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय:अष्टमोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय:अष्टमोSध्याय

मृत्यु के द्वार पर जिज्ञासा -“राजा परीक्षित के २९ प्रश्न “| १. कथा प्रवेश : गंगा तट पर अंतिम सात दिन कुरुजांगल देश के सम्राट {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्याय

विराट स्वरूप की विभूतियों का वर्णन – भूमिका -प्रश्न और प्रसंग -श्री शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं ,राजन -जब नारद जी ने ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्याय

सृष्टि वर्णन वक्ता ब्रम्हा जी -श्रोता देवऋषि नारद जी -कथा का आरम्भ ,नारद जी की जिज्ञासा – एक बार देवऋषि नारद जी अपने पिता ब्रम्हा {...}

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ब्रह्मा जी की तपस्या की कथाब्रह्मा जी की तपस्या की कथा

१.ब्रह्मा जी के जन्म के बाद घौर अज्ञान और अकेलापन – जब भगवान गर्भोदकशायी विष्णु की नाभी से कमल निकला तो उस कमल पर ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्याय

विषय- राजा परीक्षित का सृष्टिविषयक प्रश्न और सृष्टि का आरम्भ शुकदेव जी की बात सुन कर परीक्षित का मन और शांत हो जाता है |अब {...}

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संसार के सभी काम ईश्वरीय हैंसंसार के सभी काम ईश्वरीय हैं

कौशिक नामक एक ब्राह्मण थे |ब्रह्मचर्य व्रत पर अटल थे |एक दिन पेड़ की छाँह में बैठे वेद पाठ कर रहे थे कि इतने में {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीयश्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीय

विषय: जो भगवान को नहीं भजते उन का जीवन व्यर्थ है | पहले दो अध्यायों में शुकदेव जी ने ध्यान का तरीका बताया ,अब तीसरे {...}

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श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :

विषय-योग साधना से भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूप का चिन्तन – पहले अध्याय में शुकदेव जी ने बताया कि ईश्वर का ध्यान करो |अब {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :

विषय -ध्यान के योग्य परमेश्वर का स्वरूप राजा परीक्षित ने श्री शुकदेव जी से पूछा था कि मरने वाले आदमी को क्या करना चाहिए ? {...}

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ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूपऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूप

बहुत से लोग पूछते हैं ईश्वर कैसा है ? कोई कहता निराकार ,कोई साकार |पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ क्या कहते हैं ? ऐतरेय ब्राह्मण के आधार {...}

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अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

परीक्षित का अनशन व्रत और शुकदेव जी का आगमन – राजधानी में पहुंचने पर राजा परीक्षित को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिए बड़ा पश्चाताप {...}

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मेरी वेबसाईट thegodweknow.com/.inमेरी वेबसाईट thegodweknow.com/.in

मेरी वेबसाईट का उद्देश्य लोगों को ब्राह्मण ग्रन्थों के आधार पर ईश्वर के स्वरूप से अवगत करना है -मदन लाल शर्मा डोमेन नाम thegodweknow.com/.in-सीधा और {...}

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अथाष्टाद्शोSध्याय :प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)अथाष्टाद्शोSध्याय :प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

राजा परीक्षित को शृगी ऋषि का शाप -जब तक पृथ्वी पर राजा परीक्षित सम्राट रहे ,तब तक चारों और व्याप्त हो जाने पर भी कलियुग {...}

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सप्तदशोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)सप्तदशोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

महाराज परीक्षित द्वारा कलियुग का दमन -धर्म और पृथ्वी जब आपस में बात कर रहे थे उसी समय राजा परीक्षित वहां पहुंचते हैं ,तो क्या {...}

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षोडशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)षोडशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

परीक्षित की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वी का संबाद -पांडवों के महाप्रयाण के बाद भगवान के परम भक्त राजा परीक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षा के {...}

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अक्रोध की परीक्षाअक्रोध की परीक्षा

एक जिज्ञासु एक बार एक संत के पास गया और बोला – महाराज ,कोई ऐसा उपाय बताइए ,जिस से मुझे प्रभु का साक्षात्कार हो जाये| {...}

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पंचद्शोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)पंचद्शोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

श्रीकृष्ण विरह व्यथित पांडवों का परीक्षित को राज्य दे कर स्वर्ग सिधारना -भगवान के प्यारे सखा अर्जुन एक तो पहले ही श्रीकृष्ण के विरह से {...}

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द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )

परीक्षित का जन्म – अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था ,उस से उतरा का गर्भ नष्ट हो गया था ,परन्तु भगवान ने उसे पुन: जीवित {...}

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धर्म का रहस्य क्या है ?धर्म का रहस्य क्या है ?

धर्म कोई मनघडन्त वस्तू नहीं है | नित्य की जीवन यात्रा में धर्म के साथ मनुष्य का गहरा नाता है |धर्म से जीवन को मिलती {...}

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चतुर्दशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:( श्रीमद्भागवत)चतुर्दशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:( श्रीमद्भागवत)

अपशगुन देख कर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का दवारका से वापिस आना – स्वजनों से मिल कर श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते {...}

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अलोभ धर्म का आदर्श – श्राबस्ती नरेश और ब्राह्मण कुमारअलोभ धर्म का आदर्श – श्राबस्ती नरेश और ब्राह्मण कुमार

कौशाम्बी के राजपुरोहित का पुत्र था अभिरूप कपिल | आचार्य इन्द्रदत्त के पास अध्ययन करने श्राबस्ती आया हुआ था | आचार्य ने उस के भोजन {...}

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वशिष्ठवशिष्ठ

अहिंसा के आदर्श महर्षि वशिष्ठ कुशिक वंश में उत्पन्न राजा विश्वमित्र सेना के साथ आखेट करने निकले थे | अपने राज्य से दूर महर्षि वशिष्ठ {...}

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सनातन धर्म का स्वरूपसनातन धर्म का स्वरूप

सनातन का अर्थ है नित्य |वैदिक धर्म का नाम सनातन धर्म अत्यंत उपयुक्त है |अन्य किसी भी भाषा में धर्म वाचक कोई भी शब्द नहीं {...}

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धार्मिक एकताधार्मिक एकता

संसार में अनेक धर्म,नाना मत और अगणित सम्प्रदाय हैं |प्रत्यक्षत: उन सब का उद्देश्य एक ही है – मानव हृदय में परस्पर एक आध्यात्मिक सम्बन्ध {...}

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त्रयोदशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)त्रयोदशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

विदुर के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना – विदुर जी तीर्थ यात्रा से लौट आये ,उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा {...}

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एकादशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)एकादशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत -श्रीकृष्ण ने अपने आनर्त देश में पहुंच कर वहां के लोगों की विरह वेदना दूर करते हुए अपना पांचजन्य {...}

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भारत में आर्य आगमन निराधार हैभारत में आर्य आगमन निराधार है

आज से प्राय: कुछ सौ वर्ष पहले पूर्व प्रख्यात भाषाविद मैक्समूलर तथा उस के अनुयायों ने आर्यवाद की कहानी रची है | यह कहानी पूर्णत: {...}

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अथ दशमोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )अथ दशमोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )

श्रीकृष्ण का द्वारका गमन -सम्पूर्ण सृष्टि को उज्जीवित करने वाले श्री हरी परस्पर क्ल्हाग्नि से दग्ध कुरुवंश को पुन: अंकुरित कर और युधिष्ठर को उनके {...}

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नवमोSध्याय: प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)नवमोSध्याय: प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

युधिष्ठर आदि का भीष्म जी के पास जाना और श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए भीष्म का प्राण त्याग करना -महाभारत का युद्ध समाप्त होने पर {...}

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श्रीमद्भागवत -अष्टमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)श्रीमद्भागवत -अष्टमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)

गर्भ में परीक्षित की रक्षा ,कुंती द्वारा भगवान की स्तुति और युधिष्ठर का शोक -पांडव श्रीकृष्ण के साथ अपने युद्ध में मरे भाई बन्धुओं के {...}

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सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)

अश्वथामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन द्वारा अश्वथामा का मानमर्दन – जिस समय महाभारत युद्ध में कौरव और पांडव दोनों पक्षों {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-षष्ठोSध्याय (श्रीमद्भागवत)प्रथम:स्कन्ध:-षष्ठोSध्याय (श्रीमद्भागवत)

नारद जी के पूर्वचरित्र का शेष भाग – व्यास जी की जिज्ञासा नारद जी की शेष आयु कैसे व्यतीत हुई और मृत्यु के समय उन्होंने {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-पंचमोंSध्याय (श्रीमद्भागवत)प्रथम:स्कन्ध:-पंचमोंSध्याय (श्रीमद्भागवत)

महऋषि व्यास जी ने महाभारत की रचना की थी ,वे धर्म आदि पुरुषार्थों से परिपूर्ण थे ,सनातन ब्रह्म तत्व को भी जानते थे ,समस्त गोपनीय {...}

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अथ चतुर्थोSध्यायअथ चतुर्थोSध्याय

इस वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महऋषि पराशर के द्वारा वसु-कन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के अवतार व्यास जी का जन्म हुआ {...}

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तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:

सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोकों के निर्माण की इच्छा से पुरुष रूप धारण किया | उस में दस इन्द्रियां ,एक मन और पांच {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्यायप्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्याय

सूत जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है | यह समस्त वेदों का सार है | जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकार से पार {...}

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श्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्यायश्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग {...}

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ध्रुव का वन गमनध्रुव का वन गमन

ब्रह्मा जी के पुत्र महाराज स्वायम्भुव मनु और उन की पत्नी महारानी शतरूपा से प्रियव्रत और उतानपाद दो पुत्र हुए | उतानपाद की सुनीति और {...}

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संबिधान सभा के सभापति और अध्यक्ष के भाषण की प्रासंगिकतासंबिधान सभा के सभापति और अध्यक्ष के भाषण की प्रासंगिकता

भारत में व्यबस्था की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि उस का संचालन करने वाले किस तरह के हैं | संचालनकर्ताओं की प्राथमिकता {...}

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ब्राह्मण शुद्र स्त्री से विवाह कर सकता है ?ब्राह्मण शुद्र स्त्री से विवाह कर सकता है ?

(मनु स्मृति -अध्याय 2 श्लोक २३८) श्रद्धधान : शुभां विद्यामाददीताबराद्पि || अन्त्याद्पि परं धर्म स्त्रीरत्न दुष्कुलादपि || श्रध्दायुक्त हो शुभ कहिये जिस की शक्ति देखी {...}

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आत्मा -परमात्माआत्मा -परमात्मा

मनुष्य हमेशा प्रतिदिन की बातचीत में कई बार मैं शब्द का प्रयोग करता है लेकिन आश्चर्य है कि प्रतिदिन मैं और मेरा शब्द का कई {...}

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भक्ति योग का स्वरूपभक्ति योग का स्वरूप

प्रकृति ,पुरुष और महातत्व आदि के लक्षण सांख्य शास्त्र में कहे गए हैं तथा जिस के द्वारा उन का वास्तविक स्वरूप अलग अलग जाना जाता {...}

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वैराग्य,धारणा,ध्यानवैराग्य,धारणा,ध्यान

भौतिक सुखों के विषयों के प्रति उदासीनता विकसित करना वैराग्य है जिस ने सभी सांसारिक सुख और मोह माया का त्याग कर दिया है वह {...}

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सनातन धर्मसनातन धर्म

धार्यते इति धर्म:जो धारण किया जाये वह धर्म है ,समाज में मनुष्य जीवन के प्रति जो धारणा बनाता है वही उस का धर्म है |गीता {...}

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सृष्टी और मैंसृष्टी और मैं

सृष्टी से पहले यह जगत जिसे हम यूनिवर्स कहते हैं अंधकार में लीन और अज्ञात अर्थात जिसे जाना न जाये और अलक्षण अर्थात जो चिन्ह {...}

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समय की अवधारणासमय की अवधारणा

समय किसी भी कार्य को करने का सही क्षण होता है |समय अतीत से वर्तमान और भविष्य के क्रिया कलापों को क्रम में करता है {...}