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सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)
अश्वथामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन द्वारा अश्वथामा का मानमर्दन – जिस समय महाभारत युद्ध में कौरव और पांडव दोनों पक्षों {...}
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अश्वथामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन द्वारा अश्वथामा का मानमर्दन – जिस समय महाभारत युद्ध में कौरव और पांडव दोनों पक्षों {...}
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नारद जी के पूर्वचरित्र का शेष भाग – व्यास जी की जिज्ञासा नारद जी की शेष आयु कैसे व्यतीत हुई और मृत्यु के समय उन्होंने {...}
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महऋषि व्यास जी ने महाभारत की रचना की थी ,वे धर्म आदि पुरुषार्थों से परिपूर्ण थे ,सनातन ब्रह्म तत्व को भी जानते थे ,समस्त गोपनीय {...}
Theology
छान्दोग्योपनिषद में शाण्डिल्यऋषि का तत्व ज्ञान दार्शनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है | शाण्डिल्य सृष्टि मीमांसा में चरम सत्य तज्जलान को प्रथमत: सिध्द करते हैं | {...}
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इस वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महऋषि पराशर के द्वारा वसु-कन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के अवतार व्यास जी का जन्म हुआ {...}
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सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोकों के निर्माण की इच्छा से पुरुष रूप धारण किया | उस में दस इन्द्रियां ,एक मन और पांच {...}
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सूत जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है | यह समस्त वेदों का सार है | जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकार से पार {...}
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मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग {...}
History Mythological Religion Religious
ध्यायत्श्चरनाम्भोजं भावनिर्जितसा | औत्कन्ठ्याक्षुकलाक्षस्य हरदयासीन्में शनैर्हरि: | | प्रेमातिभरनिर्मिन्नपुलकाग्डोSतिनिर्वृत: | आनन्दसम्प्लवे लीनो नापश्यमुभ्यं मुने || रूपं भगवतो यत्नमन:कान्तं शुचापहम | अपश्यन सहसोतस्ये वैक्लव्याद दुर्मना इव {...}
Mythological Religion Religious
महान तत्ववेता दध्यड के ,दधिची एवं दधीच नामान्तर थे |वे अथर्वकुल में उत्पन्न हुए थे | कई स्थानों में उन्हें अथर्वन का पुत्र कहा गया {...}