दिल्ली में चल रहे छात्र आन्दोलन पर सरकार को क्या करना चाहिए ?

दिल्ली देश की राजधानी ही नहीं ,बल्कि देश के शैक्षिक ,वैचारिक और लोकतांत्रिक आन्दोलनों का केंद्र भी रही है | जे एन यूं ,दिल्ली विश्वविद्यालय,जामिया मिलिया ,इस्लामिया ,आई आई टी दिल्ली और कई अन्य संस्थानों के छात्रों ने समय समय पर अपनी मांगों और राष्ट्रीय मुद्दों को ले कर आवाज उठाई है |वर्तमान में दिल्ली में चल रहा छात्र आन्दोलन भी इसी परंपरा का हिस्सा है |

दिल्ली में चल रहे छात्र आन्दोलन मुख्य रूप से -3-४ मुद्दों को ले कर है |NEET पेपर लीक का आरोप ,CBSC की आन स्क्रीन मार्किंग में अनियमितता ,UGC के नए रेगुलेशन २००६,और NTA की कार्य प्रणाली |६ जून से जन्तर मंतर पर SFI,AISA जैसे छात्र संगठनों और अन्य युवा समूहों ने इस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किये थे |

ऐसे किसी भी छात्र आन्दोलन में सरकार के सामने दोहरी जिम्मेवारी होती है -छात्रों की बात सुनना और क़ानून व्यवस्था बनाये रखना |संतुलित रूप से सरकार को यह कदम उठाने चाहिए :-

१. संवाद का रास्ता खोलना – छात्रों के प्रितिनिधि मण्डल को शिक्षा मंत्रालय में बुला कर औपचारिक ज्ञापन लेना,जैसे पहले SFI के मार्च में हुआ था | हर आरोप पर स्पष्ट जबाब -NEET लीक पर जांच की स्थिति ,CBSC मार्किंग पर तकनीकी समीक्षा और UGC नियमों पर आपति के बिंदु क्या हैं ?

2. पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्यवाही-

पेपर लीक और परीक्षा कुप्रबन्धन के आरोपों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच ,जिस की रिपोर्ट सार्वजनिक हो,यदि गडबडी मिलती है तो जिम्मेवार एजेंसी या व्यक्ति पर कार्यवाही ,और भविष्य के लिए परीक्षा प्रणाली में सुधार का रौड्मैप |

3. शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान और सुरक्षा

शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए स्पष्ट जगह और प्रक्रिया देना ,ताकि जन्तर मंतर पर अनुमति न मिलने से टकराव जैसी स्थिति न बने |

पुलिस को संयम बरतने का निर्देश -पिछले प्रदर्शनों में पुलिस और छात्रों दोनों के घायल होने की खबरें आईं थीं , इसे दोहराने से बचना |

आन्दोलन चाहे किसी भी विचारधारा का हो

,छात्रों का मुख्य सवाल भविष्य और परीक्षा की निष्पक्षता से जुडा है |सरकार अगर सुनेगी,जांच को पारदर्शी रखेगी और बातचीत से हल निकलेगी ,तो आन्दोलन सडक से टेबल पर आ सकता है |

मदन लाल शर्मा

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