समय की अवधारणा
समय किसी भी कार्य को करने का सही क्षण होता है |समय अतीत से वर्तमान और भविष्य के क्रिया कलापों को क्रम में करता है ,अवधि समय को मापने का पैमाना है | समय आगे की तरफ चलता है इसे काल ,अवधि .अन्तराल,समय अवधि के नाम से भी जाना जाता है | समय मूल्यवान होता है कौन सा काम कब करना है ,उस की समय सीमा निर्धारित करता है |समय का सदुपयोग करने के लिए उसे हिस्सों में बाँटना अति आवश्यक है ,नौकरशाह ,विद्यार्थी या दुसरे लोग किसी भी कार्य को करने की समय सीमा निर्धारित करते हैं |समय की अवधारणा जीवन के हर पहलू को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है |घडी का अविष्कार होने से पहले भी लोग समय के महत्व को समझते थे और उस का निर्धारण करने के लिए सूर्य की छाया और उस की दिशा से ,सूर्य घडी से ,मुर्गे की बांग से ,पानी और रेत के गिरने से ,सुबह दोपहर और शाम के समय से समय का निर्धारण करते थे |समय एक भ्रम है और चेतना हमारे आसपास हो रही घटनाएँ ,वर्तमान का आभास पैदा करती हैं |भारतीयों ने परमाणु की अवधारणा के साथ ही समय की भी अवधारणा कर ली थी जो इस प्रकार है ,दो परमाणु मिल कर अणु बनाते हैं तीन अणुओं के मिलने से त्रसरेणु होता है जो किसी छेद से आ रही सूर्य की किरण के प्रकाश में उड़ता हुआ देखा जा सकता है ,ऐसे तीन त्रसरेणुओं में से प्रकाश को गुजरने जो समय लगता है उसे त्रुटी कहते हैं उस से सौ गुना वेध और तीन वेध का एक लव होता है |तीन लव का एक निमेष और तीन निमेष का एक क्षण कहते हैं ,पांच क्षण की एक काष्ठा होती है ,पन्द्रह काष्ठा का एक लघु पन्द्रह लघु का एक नाडिका कही गई है | दो नाडिकाओं का एक मुहूर्त होता है |छ या सात नाडिकाओं का एक प्रहर होता है |चार चार प्रहर के दिन और रात होते हैं | पन्द्रह दिन का एक पक्ष होता है मास में दो पक्ष शुक्ल और कृष्ण होते हैं | बर्ष में बारह महीने होते हैं | छ छ मास के दो अयन दक्षिणायन और उतरायण होते हैं यह दोनों मिल कर एक वर्ष कहलाता है | त्रुटी एक सेकंड का ३४०००वां हिस्सा है |
