श्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग है वह चेतन और स्वयं प्रकाश है | जिस ने वेद ज्ञान का दान ब्रह्मा को दिया है ,जिस के सम्बन्ध में बड़े बड़े ज्ञानी भी आश्चर्य चकित हैं ,जैसे तेजोमय सूर्य की किरणों में जल का, जल में स्थल का और स्थल में जल का भ्रम होता है ,वैसे ही जिस में यह त्रिगुणमयि जागृत-स्वप्न-सुषुप्तिरूपा सृष्टि मिथ्या होने पर सत्य प्रतीत होती है ,उस अपनी स्वयं प्रकाश ज्योति से सर्वदा और सर्वथा माया और माया कार्य से पूर्णता मुक्त रहने वाले परम सत्यरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं |

महामुनि व्यास द्वारा रचित इस श्रीमद्भागवत महापुराण में मोक्ष पर्यन्त फल की कामना से रहित परम धर्म का निरूपण हुआ है | इस में शुद्ध अंत:करण सत्पुरुषों के जानने योग्य उस वास्तविक वस्तु परमात्मा का वर्णन हुआ है ,जो कि तीनों पापों का नाश करने वाला और कल्याण करने वाला है | यह सभी शास्त्रों का शिरोमणि है अन्य किसी शास्त्र को पढने की आवश्यकता नहीं है इसी में सब शास्त्रों का सार है | इस के श्रवण की इच्छा मात्र से ही ईश्वर उसी समय अबिलम्ब उन के हृदय में आ जाते हैं | यह भागवत वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है जो कि श्री शुकदेव रुपी तोते के मुख का सम्बन्ध हो जाने से यह परमानन्दमयि सुधा से परिपूर्ण हो गया है | जब तक शरीर में चेतना रहे तब तक हमेशा इस का श्रवण करते रहना चाहिए |

एक बार शौनकादि ऋषियों ने भगवत प्राप्ति की इच्छा से सहस्त्र वर्षों में पूरे होने वाले यग्य का अनुष्ठान किया | एक दिन प्रात: नित्यकर्मों से निवृत हो कर सूत जी का पूजन किया और उन्हें ऊँचे आसन में बैठा कर बड़े आदर से यह प्रश्न किया | आप निष्पाप हैं ,आपने इतिहास ,पुराण और धर्म शास्त्रों का अध्ययन किया है तथा उन की व्याख्या भी की है | दूसरे मुनियों ने जो कुछ जाना है उन्हें जिन विषयों का ज्ञान है वे सब आप वास्तविक रूप से जानते हैं | गुरुजन अपने प्रेमी शिष्यों को गुप्त से गुप्त बात भी बता दिया करते थे | अत: आप कृपा करके बताइए कि उन पुराणों,शास्त्रों और गुरुजनों के उपदेशों से कलियुगी जीवों के कल्याण का सरल तरीका क्या है | किस प्रकार से उन का कल्याण हो सकता है ,कलियुग में लोगों की आयु कम हो गई है ,साधन करने में उन की रुचि नहीं है लोग आलसी हो गए हैं उन का भाग्य भी मंद है बुद्धि भी थोड़ी है इस लिए नाना प्रकार की समस्याओं से घिरे रहते हैं | शास्त्र भी इतने बड़े हैं तथा बहुत हैं उन का एक अंश भी सुनना कठिन है |आप परोपकारी हैं | आप कृपा करके उन का सार निकाल कर प्राणियों के कल्याण के लिए हम श्रधालुओं को सुनाइये | जिस से हमारे अंत:करण की शुद्धी हो |

सूत जी हम आप से यदुवंशियों के रक्षक भगवान् श्री कृष्ण के पैदा होने के पीछे के उद्देश्य के बारे में जानना चाहते हैं ,आप कृपा करके उस का वर्णन कीजिये | क्यों कि भगवान् का अवतार जीवों के कल्याण के लिए होता है | परम विरक्त और परम शांत मुनिजन भगवान् के श्री चरणों की शरण में ही रहते हैं |अतएव उन के स्पर्श मात्र से संसार के जीव तुरंत पवित्र हो जाते हैं | वे लीला से ही अवतार ग्रहण करते हैं कौन मनुष्य होगा जो आत्म कल्याण के लिए उन की लीलाओं का गुणगान न करे | नारदादि महात्माओं ने उन के उदार कर्मों का गान किया है | हम श्रद्धालुओं के प्रति आप उन का वर्णन कीजिये |

सूत जी,बुद्धिमान ,सर्व समर्थ प्रभु अपनी योगमाया से स्वछन्द लीला करते हैं |आप उन श्रीहरि की मंगलमयी अवतार कथाओं का बर्णन कीजिये | पुन्य कीर्ति भगवान् की लीला सुनने से हमें कभी भी तृप्ति नहीं हो सकती ,क्यों कि रसग्य श्रोताओं को पद पद पर भगवान् की लीलाओं में नये नये रस का अनुभव होता है | श्रीकृष्ण अपने आप को छुपाये हुए थे ,लोगों के सामने ऐसी चेष्टा करते थे मानो कोई मनुष्य हो ,परन्तु उन्होंने बलराम जी के साथ ऐसी लीलाएं भी की हैं,जो मनुष्य नहीं कर सकता | कलियुग को आया जानकर इस वैष्णव क्षेत्र में हम दीर्घकालीन स्तर का संकल्प करके बैठे हैं | श्रीहरि की कथा सुनने के लिए हमें अवकाश प्राप्त है | यह कलियुग अंत:करण की पवित्रता और शक्ति का नाश करने वाला है | इस को पार पाना कठिन है | इस के लिए श्रीकृष्ण जैसा कर्णधार मिल जाए तो इस कलियुग रुपी समुद्र से पार पाया जा सकता है | उसी प्रकार इस को पार पाने की इच्छा रखने बाले हम लोगों से ब्रह्मा ने आप को मिलाया है | धर्म रक्षक,ब्राह्मण भक्त,योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण के अपने धाम में पधार जाने पर धर्म ने अब किस की शरण ली है यह बताएं |

इति प्रथमSध्याय

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