श्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीय
विषय: जो भगवान को नहीं भजते उन का जीवन व्यर्थ है | पहले दो अध्यायों में शुकदेव जी ने ध्यान का तरीका बताया ,अब तीसरे अध्याय में साफ साफ कहते हैं कि आदमी भगवान का भजन नहीं करता तो उस का जन्म बेकार है ,चाहे कितना भी पढ़ लिख ले ,धन कमा ले |
आयुर्हरति वे पुंसामुद्यन्नस्त च यन्नसौ | तस्यरते यत्क्षण नीत उतमश्लोकवार्तया ||
जिस का समय भगवान श्रीकृष्ण के गुणों के गान अथवा श्रवण में व्यतीत हो रहा है ,उस के अतिरिक्त सभी मनुष्यों की आयु व्यर्थ जा रही है | ये भगवान सूर्य प्रतिदिन अपने उदय और अस्त से उन की आयु छिनते जा रहे हैं | अर्थात शुकदेव जी ने बड़ी कडवी बात कहते हैं ,हम घड़ी देखते हैं तो सोचते हैं समय बीत रहा है ,असल में हमारी उम्र कट रही है हर दिन हम मौत के करीव जा रहे हैं |
तो कौन सा समय बचा ? सिर्फ वही पल जब हम ने हरि की बात सुनी,कही या सोची ? बाकी सब समय तो यमराज ले गया |
कौन कौन व्यर्थ है :-क्या वृक्ष नहीं जीते? क्या लुहार की धौंकनी सांस नहीं लेती ?गाँव के पालतू पशु क्या मनुष्य पशु की ही तरह खाते पीते या मैथुन नहीं करते ?जिस के कान में भगवान श्रीकृष्ण की लीला कथा कभी नहीं पड़ी ,वह नर पशु ,कुते ,ग्राम,सूकर ,ऊंट और गधे से भी गया बीता है |अर्थात उस के कान व्यर्थ हैं | (2) जीभ- जो जीभ भगवान की लीलाओं का गान नहीं करती ,वह मेंढक की जीभ के समान टर्र टर्र करने वाली है ,उस का तो न रहना ही अच्छा है | (3) सिर – जो सिर कभी भगवान श्रीकृष्ण के आगे झुकता ही नहीं चाहे उस ने मुकुट ही क्यों नहीं पहना हो |(४) हाथ – जो हाथ भगवान की सेवा पूजा नहीं करते ,वे सोने के कंगन से युक्त होने पर भी मुर्दे के हाथ हैं | (५) जो आँखें भगवान की याद दिलाने वाली मूर्ती ,तीर्थ,नदी आदि का दर्शन नहीं करती ,वे मोरों की पंख में बने हुए आँखों के चिन्ह के समान निरर्थक हैं |(६) पैर – मनुष्यों के वे पैर चलने की शक्ति होते हुए भी न चलने वाले पेड़ों जैसे ही हैं ,जो कि भगवान की लीला स्थलियों की यात्रा नहीं करते |
तो करना क्या है _ अकाम: सर्वकामो वा मोक्षकाम उदारधी: | तीव्रेण भक्तियोगेन यजेत पुरुषं परम ||
जो बुद्धिमान पुरुष हैं ,वह चाहे निष्काम हो ,समस्त कामनाओं से युक्त हो अथवा मोक्ष चाहता हो ,उसे तो तीव्र भक्ति योग के द्वारा केवल पुरुषोतम भगवान की ही आराधना करनी चाहिए |
आज की सीख –
१. समय का हिसाब -रात को सोने से पहले सोचो कि आज कितना समय फोन,टीबी गपशप में गया और कितना समय भगवान के नाम में लगाया |
2. बहाना मत बनाओ – काम है,बिमारी है ,पैसा नहीं है | शुकदेव जी कहते हैं कि कोई भी इच्छा हो तब भी भजन शुरू कर दो ,भगवान सब ठीक कर देगा |
3. इन्द्रियों को काम दो – कान से कथा सुनो,मुहं से नाम जपो ,हाथ से सेवा करो | खाली बैठे हैं तो मन गलत सोचता है
निष्कर्ष – तीसरा अध्याय झकझोर देता है |शरीर मिला है तो भगवान के काम आना चाहिए ,वरना पशु और हम में क्या फर्क रह जाएगा | इसलिए उठते बैठते ,चलते फिरते हरि का नाम लो ,यही समय की असली कमाई है |
लेखक-मदन लाल शर्मा
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