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सृष्टी और मैंसृष्टी और मैं
सृष्टी से पहले यह जगत जिसे हम यूनिवर्स कहते हैं अंधकार में लीन और अज्ञात अर्थात जिसे जाना न जाये और अलक्षण अर्थात जो चिन्ह {...}
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सृष्टी से पहले यह जगत जिसे हम यूनिवर्स कहते हैं अंधकार में लीन और अज्ञात अर्थात जिसे जाना न जाये और अलक्षण अर्थात जो चिन्ह {...}
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समय किसी भी कार्य को करने का सही क्षण होता है |समय अतीत से वर्तमान और भविष्य के क्रिया कलापों को क्रम में करता है {...}
Mythological Religion Religious Theology
हम मैं से उस का अर्थ अपने शरीर से लेते हैं लेकिन मैं शरीर नहीं हूँ कभी सोच कर देखो |मैं कौन हूँ ,जानने के {...}
Religion Religious Theology
निरखि किन नयना होऊ निहाल | अति अदभुत आनंद-अम्बुद -सी सोहत सो सुखमा सुविसाल ||१ || नीरद-तनु दामिनी-सी दमकत छिन-छिन छवि-कन झरत रसाल | अंग-अंग {...}