ब्राह्मण शुद्र स्त्री से विवाह कर सकता है ?
(मनु स्मृति -अध्याय 2 श्लोक २३८)
श्रद्धधान : शुभां विद्यामाददीताबराद्पि || अन्त्याद्पि परं धर्म स्त्रीरत्न दुष्कुलादपि ||
श्रध्दायुक्त हो शुभ कहिये जिस की शक्ति देखी है ऐसी गारुड आदि विद्या को शुद्र से भी ग्रहण कर लें और चांडाल से भी मोक्ष के उपाय तत्व ज्ञान को ग्रहण करें और अपने कुल से नीचे कुल के भी स्त्री रत्न को व्याह करने के लिए ग्रहण करें || (मूल अनुवाद )
पूर्व काल में यह बिद्या गरुड ने तीनों लोकों की रक्षा के लिए रची थी बुद्धिमान साधक को चाहिए कि वह अपने कंठ में कुरु ,पिंडलियों में कुण्ड और दोनों पेरों में स्वाहा स्थापित करे |अगर ऐसी बिद्या शुद्र से भी मिले तो उसे ग्रहण कर लेना चाहए | आत्मा का सर्वथा शुद्ध हो जाना मोक्ष तत्व है ,सब प्रकार के सुख दुःख और मोह आदि का छूट जाना ही मोक्ष है | नश्वरता को दुःख का कारण माना गया है ,संसार आवागमन जन्म मरण और नश्वरता का केंद्र है ऐसा ज्ञान अगर चांडाल से भी मिले तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए | अगर उत्कृष्ट अर्थात सुंदर,सुशील ,सर्व गुण सम्पन्न स्त्री किसी शुद्र कुल से भी मिले तो उस से व्याह कर लेना चाहिए |
