मुक्ति के तीन उपाय
महात्मा बुद्ध ने उन्नीस वर्ष की आयु में ही जीवन में संसार के दुखों से मुक्ति प्राप्त करने का उपाय ढूँढने के लिए अपने परिवार को छोड़ दिया | पैंतीस वर्ष की आयु में उन्हें उपाय मिल भी गया था | उस के बाद पैंतालिस वर्षों तक उन्होंने अपने विचारों का प्रचार -प्रसार भी किया |
अंतिम क्षणों में वे एक वृक्ष के नीचे सो गए और अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे | उन का परम शिष्य आनंद उन के पास ही सेवा में तल्लीन था | तभी एकाएक उस के मन में यह भाव आया कि नजदीक गाँव में बुद्ध के कई शिष्य रहते हैं | यदि मैंने उन्हें भगवान के अंतिम समय के बारे में नहीं बताया तो सभी शिष्य नाराज हो जायेंगे |
यह सूचना तेजी से फैली और गाँव वासी धीरे धीरे वृक्ष के पास एकत्रित होने लगे और भगवान बुद्ध का दर्शन लाभ ले कर कृतार्थ होने लगे | एक शिष्य अपनी जिज्ञासा लिए आया | बुद्ध ने उसे अपने करीब बुलाया | उस शिष्य ने हाथ जोड़ कर उन से जीवन में मुक्ति पाने का आग्रह किया |
बुद्ध बोले ,”जीते जी जन्म-मरण से मुक्ति प्राप्त करना चाहते हो तो तीन बातें हमेशा याद रखो और इन पर अमल करो | पहली ,यथा सम्भव पापों से बचो | दूसरी ,जीवन में जितने भी पुन्य कर सकते हो ,करो ,और तीसरी ,अपना चित निर्मल रखो |
प्राण त्यागने से पहले भगवान बुद्ध ने मानव -जाति को अंतिम और जीवन का सार सूत्र समझाया |
