हिटलर और आज का भारत

हिटलर की जर्मनी में विपक्ष को समाप्त करने और आज के भारत में विपक्ष के कमजोर होने को लेकर जो तुलना की जाती है ,उस में दो तरह की बातें की जाती हैं -एक तो वो तरीके जो हिटलर ने अपनाए थे और दूसरे वो आरोप जो आज भारत में विपक्षी दल और कुछ टिप्पणीकार लगाते हैं |

१ हिटलर ने क्या किया था विपक्ष को खत्म करने के लिए ?

कानूनी तरीके से सता में आ कर फिर कानून बदलना |१९३३ में चांसलर बनने के बाद Enabling Act ला कर संसद को अप्रासंगिक बना दिया |

विपक्षी दलों पर प्रतिबन्ध -कम्युनिष्ट पार्टी पर Reiching Fire का आरोप लगा कर प्रतिबन्ध ,फिर १९३३ में सभी पार्टियों पर प्रतिबन्ध -one पार्टी one state. संस्थाओं पर कब्जा -न्याय पालिका ,पुलिस ,मिडिया,विश्वबिद्यालय ,सब को नाजी पार्टी के अधीन करना | प्रोपेगैंडा और नेता की छवि-गोएवल्स के नेतृत्व में पूरा प्रचार तन्त्र ,जहाँ नेता = देश बन गया |

विरोधियों को देश द्रोही बताना -विपक्ष को राष्ट्र का दुश्मन ,आंतरिक खतरा बता कर कार्यवाही |

2. आज के भारत में विपक्ष को लेकर तरह तरह की समानताएं बताई जाती हैं ?ये मुख्य रूप से आलोचकों द्वारा उठाये गए बिंदु हैं |

क – केन्द्रिय एजेंसियों का उपयोग :ED,CBI,Income Tax का विपक्षी नेताओं पर ज्यादा सक्रिय होने का आरोप मीडिया पर दबाब – बड़े मिडिया हाउस का सरकार के पक्ष में झुकाव,जिसे गोदी मिडिया कहा जाता है |

ग. . राष्ट्रवाद नैरेटिव -विरोध को राष्ट्र -विद्रोही बतानेकी भाषा जैसे टुकड़े टुकड़े गैग,अर्बन नक्सल जैसे शब्दों का प्रयोग |

घ. चुनावी संसाधनों में असमानता : इलेक्ट्रोरल बांड्स, पार्टी फंडिंग और बड़े पैमाने पर प्रचार में सताधारी दल की बढत से विपक्ष के लिए चुनावी जमीन कठिन होना |ड . दल बदल और सरकार गिराना -विपक्षी विधायकों के टूटने से कई राज्यों में विपक्षी सरकारों का गिरना |.

3. बहुत बड़े अन्तर भी हैं जिन्हें नजर अंदाज नहीं किता जा सकता –

क. चुनाव होते भी हैं और विपक्ष जीतता भी है : १९३३ के बाद जर्मनी में कोई स्वतंत्र चुनाब नहीं हुआ |भारत में २०२४ में लोकसभा चुनाव में २३०+ सीटें जीती,कई राज्यों जैसे कर्नाटक,तेलंगाना,तमिलनाडू ,केरल,पंजाब ,बंगाल में विपक्षी दलों की सरकारें हैं |

ख.न्यायपालिका और संस्थाएं काम कर रही हैं | भारत में सुप्रीम कोर्ट ने कई बार सरकार के फैसलों पर रोक लगाई -जैसे इलेक्ट्रोरल बांड को असंवैधानिक ठहराना ,आर्टिकल ३७० पर लम्बी सुनवाई| हिटलर के जर्मनी में ऐसा संभव नहीं था |

ग. विपक्षी प्रतिबंधित नहीं हैं -भारत में कोई विपक्षी पार्टी वैन नहीं है ,उन के नेता संसद में बोलते हैं ,प्रेस कांफ्रेस करते हैं,कोर्ट में जाते हैं |हिटलर के बारे में विपक्षी नेताओं को जेल ,निर्वासन या मौत का सामना करना पड़ता था |

घ. प्रेस और सोशल मीडिया पर आलोचना खुले आम है :अखबारों,उट्यूब,ट्विट्टर /x पर रोज होती है,जो नाजी जर्मनी में अकल्पनीय थी |

निष्कर्ष- हिटलर का मोडल विपक्ष का भौतिक और कानूनी विनाश था ,जब कि भारत में बहस है वो राजनितिक स्पेस के सिकुड़ने को ले कर है | एक तानाशाही द्वारा विपक्ष को खत्म करना था ,दूसरा लोकतंत्र के अन्दर सताधारी दल के प्रभुत्व का सवाल है |

इति -मदन लाल शर्मा

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