Theology

ऋषि शाण्डिल्य (तत्वचिंतन )ऋषि शाण्डिल्य (तत्वचिंतन )

छान्दोग्योपनिषद में शाण्डिल्यऋषि का तत्व ज्ञान दार्शनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है | शाण्डिल्य सृष्टि मीमांसा में चरम सत्य तज्जलान को प्रथमत: सिध्द करते हैं | {...}

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अथ चतुर्थोSध्यायअथ चतुर्थोSध्याय

इस वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महऋषि पराशर के द्वारा वसु-कन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के अवतार व्यास जी का जन्म हुआ {...}

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तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:

सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोकों के निर्माण की इच्छा से पुरुष रूप धारण किया | उस में दस इन्द्रियां ,एक मन और पांच {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्यायप्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्याय

सूत जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है | यह समस्त वेदों का सार है | जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकार से पार {...}

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श्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्यायश्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग {...}

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श्री मद्भागवत की महिमाश्री मद्भागवत की महिमा

ध्यायत्श्चरनाम्भोजं भावनिर्जितसा | औत्कन्ठ्याक्षुकलाक्षस्य हरदयासीन्में शनैर्हरि: | | प्रेमातिभरनिर्मिन्नपुलकाग्डोSतिनिर्वृत: | आनन्दसम्प्लवे लीनो नापश्यमुभ्यं मुने || रूपं भगवतो यत्नमन:कान्तं शुचापहम | अपश्यन सहसोतस्ये वैक्लव्याद दुर्मना इव {...}

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दध्यड आथर्वण ( ऋषि दधीचि )दध्यड आथर्वण ( ऋषि दधीचि )

महान तत्ववेता दध्यड के ,दधिची एवं दधीच नामान्तर थे |वे अथर्वकुल में उत्पन्न हुए थे | कई स्थानों में उन्हें अथर्वन का पुत्र कहा गया {...}

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वामदेववामदेव

मह्रिषी वामदेव गोतम ऋषि के पुत्र थे | ऐसा माना जाता है कि उन्हें माता के गर्भ में रहते हुए ही आत्मानुभूति ,आत्म साक्षात्कार हुआ {...}

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परोपकार मानव धर्मपरोपकार मानव धर्म

संसार में अनन्त जीव हैं ,उन में मानव ही सर्व श्रेष्ठ है | मह्रिषी व्यास जी ने भी यही कहा है कि मनुष्य से बढ़ {...}

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संयम -पालन के आदर्श (अर्जुन)संयम -पालन के आदर्श (अर्जुन)

भगवान व्यास के निर्देशानुसार पांडवों ने नियम बनाया था कि द्रोंपदी के साथ पन्द्रह पन्द्रह दिन प्रत्येक भाई रहे | जब एक भाई द्रौपदी के {...}