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द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )
परीक्षित का जन्म – अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था ,उस से उतरा का गर्भ नष्ट हो गया था ,परन्तु भगवान ने उसे पुन: जीवित {...}
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परीक्षित का जन्म – अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था ,उस से उतरा का गर्भ नष्ट हो गया था ,परन्तु भगवान ने उसे पुन: जीवित {...}
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धर्म कोई मनघडन्त वस्तू नहीं है | नित्य की जीवन यात्रा में धर्म के साथ मनुष्य का गहरा नाता है |धर्म से जीवन को मिलती {...}
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अपशगुन देख कर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का दवारका से वापिस आना – स्वजनों से मिल कर श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते {...}
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कौशाम्बी के राजपुरोहित का पुत्र था अभिरूप कपिल | आचार्य इन्द्रदत्त के पास अध्ययन करने श्राबस्ती आया हुआ था | आचार्य ने उस के भोजन {...}
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आजकल शूद्र नाम लेने मात्र से ही यह मान लिया जाता है कि यह वर्ण निकृष्ट है | पर यह वास्तव में लोगों की महान {...}
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अहिंसा के आदर्श महर्षि वशिष्ठ कुशिक वंश में उत्पन्न राजा विश्वमित्र सेना के साथ आखेट करने निकले थे | अपने राज्य से दूर महर्षि वशिष्ठ {...}
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सनातन का अर्थ है नित्य |वैदिक धर्म का नाम सनातन धर्म अत्यंत उपयुक्त है |अन्य किसी भी भाषा में धर्म वाचक कोई भी शब्द नहीं {...}
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संसार में अनेक धर्म,नाना मत और अगणित सम्प्रदाय हैं |प्रत्यक्षत: उन सब का उद्देश्य एक ही है – मानव हृदय में परस्पर एक आध्यात्मिक सम्बन्ध {...}
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विदुर के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना – विदुर जी तीर्थ यात्रा से लौट आये ,उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा {...}
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द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत -श्रीकृष्ण ने अपने आनर्त देश में पहुंच कर वहां के लोगों की विरह वेदना दूर करते हुए अपना पांचजन्य {...}