इतिहास के पढने से क्या शिक्षा मिलती है ?

१. अतीत को समझना और वर्तमान को जानना

आज जो हम हैं ,वह हमारे अतीत का ही परिणाम है | हमारा समाज ,हमारी संस्कृति ,कानून ,राजनीती और हमारी समस्याएं -सब की जड़ें इतिहास में हैं |इतिहास पढने से हमें पता चलता है कि वर्तमान व्यवस्था कैसे बनी |जैसे भारत बर्ष में लोकतंत्र क्यों है,जाति व्यवस्था कैसे बिकसित हुई या आजादी हमें कैसे मिली ,यह सब इतिहास ही बताता है बिना अतीत को जाने वर्तमान को सही तरह से समझा नहीं जा सकता |

2. पहचान और जड़ों से जुड़ाव –

इतिहास हमें बताता है | हमारा परिवार ,हमारा गाँव ,हमारा देश -सब का इतिहास है |यह ज्ञान हमें अपनी पहचान देता है और संस्कृति पर गर्व करना सिखाता है |जब हम महाराणा प्रताप,रानी लक्ष्मी बाई ,भगत सिंह या महात्मा गाँधी के बारे में पढ़ते हैं तो हमें अपनी सास्कृतिक विरासत से जुड़ाव महसूस होता है |

3.गलतियों से सीखना और भविष्य को बेहतर बनाना –

इतिहास मनुष्य के अनुभवों का सब से बड़ा शिक्षक है |युद्ध,तानाशाही ,समाजिक भेद भाव ,आर्थिक मंदी जैसी घटनाओं ने मानवता को क्या नुकसान पहुंचाया ,यह इतिहास बताता है |इस से हम सीखते हैं कि उन गलतियों को दोहराया न जाए |प्रसिद्ध कथन है ,” जो लोग इतिहास से नहीं सीखते ,वे उसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं|”

४.आलोचनात्मक और तार्किक सोच का विकास –

इतिहास केवल कहानी नहीं है | इस में तथ्यों की जांच पड़ताल विभिन्न स्त्रोतों की तुलना ,कारण और परिणाम का विश्लेषण करना होता है | एक ही घटना के कई दृष्टिकोण क्यों हैं |यह समझने से विद्यार्थी में तर्क करने,सवाल पूछने और अपना स्वतंत्र मत बनाने की क्षमता विकसित होती है | यह अंधविश्वास और अफवाहों से बचाता है |

५. नैतिक मूल्यों और नागरिकता का निर्माण –

इतिहास हमें न्याय,स्वतन्त्रता ,समानता और बन्धुत्व जैसे मूल्यों का महत्व सिखाता है | स्वतन्त्रता संग्राम ,मानवाधिकार आन्दोलनों और सामाजिक सुधारों की कहानियां हमे एक अच्छा और जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा देती हैं |हमें अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों का बोध होता है |

६. सामाजिक परिवर्तन और सहिष्णुता को समझना –

इतिहास पढने से पता चलता है कि समाज स्थिर नहीं है ,वह लगातार बदलता है | धर्म,भाषा,कला,विज्ञान और अर्थ व्यवस्था कैसे बदली,यह जानने से हमारे मन में दूसरे धर्मों ,संस्कृतियों और विचारों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता बढती है |हम समझते हैं कि विविधता ही मानव सभ्यता की ताकत रही है |

7. राष्ट्र निर्माण और एकता

किसी भी देश के लिए अपने नागरिकों को एक सूत्र में बांधने के लिए सांझा इतिहास जरूरी है | इतिहास पढाने से लोगों में राष्ट्रीय एकता और सामूहिक जिम्मेवारी की भावना पैदा होती है |

निष्कर्ष के तौर पर ,इतिहास पढने का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं,इस का असली उद्देश्य मनुष्य को अधिक समझदार ,विवेकशील ,सहनशील और दूरदर्शी बनाना है |यह हमें अतीत को रौशनी में वर्तमान को समझदार बेहतर भविष्य बनाने का विवेक देता है |

मैं इतिहास की एक घटना का जिक्र कर रहा हूँ आप का विवेक क्या कहता है ? क्या आप को उस काले अध्याय से सबक लेना चाहिए या नहीं यह आप के विवेक पर निर्भर करता है ?

हिटलर सता में एक दिन में नहीं आया १४ वर्ष कि प्रक्रिया थी ,३० जनवरी १९३३ को उसे जर्मनी का चांसलर (प्रधान मत्री) बनाया गया | उस के बाद march १९३३ में उस ने सारी शक्तियाँ अपने हाथ में ले लीं और अगस्त १९३४ में राष्ट्रपति की मौत के बाद वो अकेला सर्वोच्च नेता बन गया |

१. सता में कैसे आया – बारसा संधि १९१९ ,जर्मनी हार गया था ,उस पर भारी जुर्माना लगाया गया और पाबंदियां लगाई गईं |लोग गुस्से में थे और गरीबी में थे |हिटलर ने कहा- मैं जर्मनी का सम्मान वापिस लाऊंगा |

2. नाजी पार्टी का बनाना -१९१९ में वह एक छोटी सी पार्टी में शामिल हुआ ,जिस का नाम बाद में NSDAP नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी रखा गया |वह बहुत अच्छा भाषण देता था | उसने यहूदियों,कमुनिस्टो,और पुरानी सरकार को जर्मनी की हार के लिए जिम्म्बार ठहराया |

3. असफल विद्रोह और जेल -१९२९ में उस ने म्यूनिख में असफल विद्रोह किया था उस के लिए उसे जेल भी हुई थी | जेल में उस ने Mein Kampf लिखी ,जिस में उस के विचार थे |

४. आर्थिक मंदी –

सब से बड़ा मौका १९२९-१९३२ -१९२९ में पूरी दुनियां में बड़ी आर्थिक मंदी आई,जर्मनी में ६० लाख लोग बेरोजगार हो गए ,लोग भूखे थे उस समय की सरकार कुछ नहीं कर रही थी |

लोगों को हिटलर की बातों में उम्मीद जगी | बड़े उद्योगपतियों ने सोचा की हिटलर को चांसलर बना कर उस को अपने काबू में रखेगे |जनवरी १९३० को उसे चांसलर बना दिया गया | चांसलर बन् ने के एक महीने बाद संसद भवन में आग लगी ,हिटलर ने इस का बहाना बना कर विरोधियों को जेल में डाल दिया |और फिर Enabling Act कानून पास कर सारी शक्तियाँ हाथ में ले लीं | इस के बाद जर्मनी में लोकतंत्र समाप्त हो गया |

हिटलर ने विरोधियों को कैसे खत्म किया –

हिटलर ने १९३३-१९३४ के बीच कई चालों से खत्म किया था |

१.पूरी ताकत अपने हाथ में लेना -हिटलर का मानना था कि लोकतंत्र,दूसरी पार्टियाँ और बहस जर्मनी को कमजोर बनाते हैं | वो एक ही पार्टी ,एक नेता बाला तानाशाही राज चाहता था |

2. नाजी विचार धारा लागू करना – वह यहूदियों,कमुनिस्टों और विरोधियों को जर्मनी की हार का कारण मानता था | ऐसा पहले भी होता रहा है |

3. किसी भी खतरे को पहले रोकना – उसे डर था कि अगर विपक्ष रहा तो सरकार गिर सकती है |इस लिए विपक्ष को खत्म करो |

कैसे खत्म किया ?

१. राइखस्टाग में आग लगाना -फरबरी १९३३ संसद भवन में आग लगी ,हिटलर ने इस का इल्जाम कमुनिस्टो पर लगाया |उसी रात हजारों कमुनिस्ट नेताओं,ट्रेड यूनियन बालों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया |

2.सभी अधिकार लेना –

Enabling Act march १९३३-इस क़ानून से हिटलर को बिना संसद की मंजूरी लिए कानून बनाने का अधिकार मिल गया |इस के बाद संसद का कोई मतलब नहीं रहा |

3. दूसरी पार्टियों पर पाबंदी -जुलाई १९३३ तक जर्मनी की सभी पार्टियाँ सोशल डेमोक्रेट ,कमुनिस्ट आदि को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया | सिर्फ नाजी पार्टी-NSDAP बची |उन का नारा था एक जनता,एक साम्राज्य ,एक नेता | डर की मशीनरी बनाना | SA,SS,Gestapo ये उस की निजी सेनायें और गुफिया पुलिस थी,जो भी विरोध करता ,उसे पीटा जाता,नौकरी से निकाला जाता |

४. पहला डीटेनशन कैंप डाउच १९३३-राजनितिक कैदियों के लिए पहला कैंप वहीं बना | |

५. अपनी ही पार्टी के विरोधियों को मारना – Night ऑफ़ long knives ,जून १९३४-हिटलर को लगा कि उस की पार्टी की SA टुकड़ी का नेता अनर्र्ट रोम और कुछ पुराने साथी उन के लिए खतरा हैं | एक रात में लगभग ८५ से अधिक लोगों की हत्या करवा दी | इस के बाद सेना ने भी हिटलर के प्रति वफादारी की कसम खाई |

६.प्रचार और प्रेस पर कब्जा -गोयवल्स के जरिये अखबार,रेडिओ,कितावे,फ़िल्में सब पर नाजी नियन्त्रण हो गया |विरोधी अखबार बंद कर दी गए | स्कूलों में भी नाजी प्रचार पढाया जाने लगा |

संक्षेप में,उस ने क़ानून का सहारा ले कर क़ानून को ही खत्म कर दिया , और फिर पुलिस और डर के सहारे हर आबाज को दवा दिया |

आप का विवेक क्या कहता है ?

इति –

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