Srimad Bhagwat Ashtavkra Geeta
इच्छाओं के बंधन टूटे तो आत्मा को मिला परम आनन्दइच्छाओं के बंधन टूटे तो आत्मा को मिला परम आनन्द
श्लोक – कायकृत्यासह:पूर्व ततो वाग्विस्तरासह : | अत चिन्तासहस्तस्माद एकमेवाहमास्थित: || १|| सामान्य अर्थ – जनक कहते हैं -पहले मैं शारीरिक कर्मों से ऊब गया {...}
